जलिल करती हो क्यों ऎसे हमे

जलिल करती हो क्यों ऎसे हमे
हम तो पहले से ही बदनाम हुए बैठे है
चौखट मे रात गुजार देने दो हमे
हम तो पहले से ही कुर्वान हुए बैठे है
आज आती है किस पर कयामत देखो
हम तो पहले से ही निशान लिए बैठे है
शराफत से हमे भी पिला दे एक जाम
हम तो पहले से ही बेइमान बने बैठे है
आते है कौन इनशान यहा पहले तुँ बता
हम तो पहले से ही शैतान बने बैठे है
मरने की हमे तुँ अब न खौफ़ दिखा
हम तो पहले से ही शमशान बने बैठे है
लुटाती हो रोज अपने हुश्न शरिफों के आगे
हम भी सदियों से ये अरमान लिए बैठे है

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