सारे जहाँ से अच्छा गीत गुनगुनाता हूँ

न वेद-पुराण ही कभी सुनता-सुनाता हूँ

न रामायण में ही कभी ध्यान लगाता हूँ

न गीता का पाठ कभी पढ़ता-पढ़ाता हूँ

न ही किसी भजन में ही रमता-रमाता हूँ

जब भी मन होता है ऐसे किसी काम का

बस “सारे जहाँ से अच्छा ” गीत गुनगुनाता हूँ

न चारों धाम की यात्रा का ही कभी आनंद उठाता हूँ

न किसी मंदिर मस्जिद में ही कभी शीश झुकाता हूँ

न गंगा स्नान कर कभी पाप धोकर आता हूँ

न ही कोई दान पुण्य कर कभी कोई नाम कमाता हूँ

जब भी मन होता है देवों की पूजा का

बस “सारे जहाँ से अच्छा ” गीत गुनगुनाता हूँ

शहीदों की धरती पर जन्मा सोचता हूँ, इतराता हूँ

नमन करता हूँ उन्हें जिनके कारण आज मुस्काता हूँ

श्रन्धांजलि अर्पित करता हूँ उन्हें श्रद्धा के सुमन चढ़ाता हूँ

ओर करता हूँ जब याद उन्हें तो मन से छलक जाता हूँ

जब भी मन होता शहीदों को याद करने का

बस “सारे जहाँ से अच्छा ” गीत गुनगुनाता हूँ

वीर शहीदों की कथा सुन, कभी रोता हूँ- तो कभी हर्षाता हूँ

गुरुओं के शीश चढाने की बात सुनता हूँ तो काँप जाता हूँ

झाँसी की रानी की कहानी पढता हूँ तो फूला न समाता हूँ

गौर्वान्तित हूँ की भारत का बेटा कहलाता हूँ

जब भी मन होता वीरों की वीरगति को प्रणाम करने का

बस “सारे जहाँ से अच्छा ” गीत गुनगुनाता हूँ

सुनता है जो ऊपर वाला तो उस तक यह सन्देश पंहुचाता हूँ

जन्मू तो सदा बुद्ध की धरा पर, यही इतनी इच्छा जताता हूँ

जब जब ऊंचाई पर देखता हूँ तो हिन्दुस्तान को पाता  हूँ

सपना जो आये कोई तो सपने में तिरंगा लहराता हूँ

जब भी मन होता किसी ऐसे अपने से सपने  का

बस “सारे जहाँ से अच्छा ” गीत गुनगुनाता हूँ .

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गुरचरन मेह्ता    

2 Comments

  1. Dharmendra Sharma 11/03/2013
  2. Gurcharan Mehta 'RAJAT' गुरचरन मेह्ता 12/03/2013

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