मान

हे नर तेरा मान कहाँ है?
निजता का सम्मान कहाँ है?
भंगुर जीवन पर इठलाता,
सत का अनुसन्धान कहाँ है??

क्षण भर जीवन क्षणिक बसेरा,
उस पर भी माया का घेरा।
जिसको पीकर मस्त हुआ तू,
रक्त हृदय का है वो तेरा।।

बियावान जंगल ये जग है,
कहीं पुष्प कण्टक ये डग है।
भांति-भांति ज्वालाएं घेरें,
इनसे जूझ, बढ़ाना पग है।।

मानव तन उपहार मिला है,
मोक्ष मार्ग का द्वार खिला है,
अब तो सफल बना ले जीवन,
भटक गया तो किसे गिला है।।

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  1. मीनाक्षी सक्सेना 08/03/2013

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