हमसफ़र तुमसा प्यारा मिले न मिले – SALIM RAZA REWA

हमसफ़र तुमसा प्यारा मिले न मिले!
साथ मुझको तुम्हारा मिले न मिले !

इश्क़ का कर दे इज़हार तन्हा  है वो !
ऐसा मौक़ा दुबारा   मिले   न मिले !

जीले खुशिओं की पतवार है हाँथ में !
बहरे   ग़म में किनारा मिले न मिले !

वो भी होते तो आता मज़ा और भी  !
फिर सुहाना नज़ारा मिले न  मिले !

साँस बनकर रहो  धड़कनों  में मेरी !
ज़िन्दगी फिर खुदारा मिले न मिले !

माँ की शफ़क़त जहाँ में बड़ी चीज़ है !
ये मुहब्बत की धारा  मिले  न मिले !

आज जी भर के दीदार कर ले रज़ा !
चाँद का ये  नज़ारा  मिले न मिले !

 

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