जिन्दगी कुछ इस तरह

जिन्दगी कुछ इस तरह व्यवहार करती है

जैसे बिल्ली चूहे  से खिलवाड करती है

चल पडे तो वक्त ने पन्जे अडा दिये

रुक गये तो रोशनी तकरार करती है॥

सुख समन्दर मे मिली बुन्द की है खोज

दुख की बदली रात दिन बरसात करती है॥

रेशा रेशा चान्दनी  का पी लिया तो क्या

विष वमन तो प्यर की खैरात करती है॥

रोजी रोटी ओर बस कुछ नाम के लिये

हर नई पीढी नया अपराध करती  है।

 

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