भूल न सके उनके दर्द को हम , जो उस दिन अपनी नज़रों से हमने देखा

परदे के पीछे छिपे किसी का दर्द झलकते देखा
वो हस तो रहे थे ऊपर से मगर
उनके मासूमियत भरी आँखों से आंसू गिरते देखा
हम स्तब्ध रह गए उनकी मजबूरियों को देखकर
गौर किया हमने बारिकी से उनके जीवन का तो हमने उनको
एक दुसरे से सिमट कर सिसक के रोते देखा …
उनकी इज्जत थी खतरे में अब तो
बस परदे से उनको अपनी आबरू को ढकते देखा
ख़ुदा ने नाइन्शाफी किया है है उनके साथ ऐसा अब कहत है मेरा दिल
मैंने सोचा कोसते होगे ख़ुदा की खुदाई को वो हर पल
पर खुद की नज़रों से उनको ख़ुदा की इबादद करते देखा …
खुद की थाली पड़ी थी खाली , पेटो थी भूख की आंधी
खुद की रोटी को दुसरे की थाली में रखते देखा
हम उम्र में छोटे थे उनसे , पर औदे में थे बड़े
ये सोच के हम झुके नहीं , और उनकों अपने सामने सर झुकाते देखा
नयनन भर अन्सुयन से , डूब गए हम ग्लानी में
भूल न सके उनके दर्द को हम , जो उस दिन अपनी नज़रों से हमने देखा
हमें अज्ञानी थे कल तक , समझ नहीं प् रहे थे अभाव के दर्द को
बदल गए हम उसी वक्त जब उनको खुद के सामने झुकते देखा…
बस परदे से उनको अपनी आबरू को ढकते देखा
मुअज्जिज थे अपने मोहल्ले के , बिन मुकम्मल भरी थी उनकी ज़िन्दगी
खुद के हाथ खुद के लिए बड़े नहीं थे , उसे दूसरों के लिए हमने बढ़ाते देखा ….
वशीभूत हो गए हम उनके वल्दियत से ….
बीतता रहा उही कुछ कुछ पल ज़िन्दगी में
विस्मित हुआ मै एक दिन , विस्फोटित हुआ मुस्कान
जब हौसलों के दम में , उनको विहायस को छूते देखा …

.शिक्षा :- गरीबी अमीरी इन्शान को कुछ पल के लिए विकास से वंचित कर सकती है हमेशा नहीं …
♥♥♥शिव कुमार सिंह ♥♥♥

Leave a Reply