हम मायूस ना हो कभी ये सोच के वे सब कुछ करते जा रहे है

अपने पितृजनों के इल्तिफ़ात से हम आज आगे बढते जा रहे है
हम मायूस ना हो कभी ये सोच के वे सब कुछ करते जा रहे है
जो कुछ है हमारे पास सब देन है उन्ही की
परिश्रान्त हो चुके, फिर भी मंजिल को चलते जा रहे है
मुअल्लिम हु मै खुद अपना अब यहाँ पे
अब अपने इल्म के दम पे इल्लत सुधारने जा रहे है
नहीं बड़ा हो सकते अपने माँ बाप से हम कभी
देखे है हमको लेकर सपनों को जो उन्होंने
इसके लिए हम मुआफ़िक पथ पे चलते जा रहे है
“हर माँ बाप की तमन्ना होती है की उसके बच्चें आकाश को चूमे ”
उनकी हर चाहत को दिल में संजोये है हमने
आकाश में है तारें , छूने की है तमन्ना
बस इस तमन्ना को हकीक़त में बदलने जा रहे है
पड़ गए है पाव में छाले , दुखने लगा है सर अपना
बस अपनी मुकद्दर को सिकंदर में मुकम्मल करने जा रहे है..
आज उनके अरमानों को मूर्त रूप देने का वक्त है आया
हासिल किया है हमने उनके दिलों की चाहत
इस हासिली को देख वो मुस्कुराये जा रहे है
खुश हु मै आज दिल से , अपने हर कदम से
क्योंकि हर कदम सही था अपना जो हमने थे बढाये
कुछ और नहीं है कहना . बस विराम की तरफ जा रहे है
♥♥♥शिव कुमार सिंह ♥♥♥

Leave a Reply