हर ख़ामोश निगाहों में एक सवाल होता है

हर खामोश निगाहों में एक सवाल होता है,
हर लम्हों में बस तेरा ख़याल होता है,
कई बार पूछा नियति से तुम्हारे बारे में,
और उसका हर बार एक ही जवाब होता है।।

आज मुघे मिली हर ख़ुशी अधूरी है,
तुम्हें याद करना भी बहुत जरुरी है,
एक पल भी ऐसा नहीं की तुम याद ना आओ,
पर सब भूल आगे बढ़ना भी तो जरुरी है।।

तुम्हारे देखे हर सपने को पूरा करना है,
यहाँ हर कदम पे पल- पल मरना है,
हर मोड़ पे यहाँ सदमे बहुत मिलेंगे,
पर तुम्हारे सपनों के लिए,हर सदमों से गुज़रना है।।

नियति के इशारे को हम कभी समघ ना पाए,
हर बुरे वक़्त को ख़ुशी में बदल ना पाए,
वो दिन मुघे याद है जब तुम दूर जा रहे थे ,
हम बस देखते रह गये पर तुम्हें रोक ना पाए।।

ज़िन्दगी तो बहुत आगे आ गयी,पर उसमें वो बात नहीं,
कहने को तो बहुत अपने है पर मुश्किल में कोई साथ नहीं,
हर मोड़ पे सबने साथ निभाने का दावा तो कर दिया,
पर जब अकेली पड़ी मैं ,तो सर पे किसी का हाथ नहीं।।

अब इस दुनिया से मेरा यकीन उठ गया है,
मेरा भगवान भी मुघसे रूठ गया है,
एक बस तुम्हारी यादों का ही सहारा है,
और बाकी सबसे मेरा साथ ही छूट गया है।।

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