बिन पथ के चलने का ख्वाब हमने देखा

पहली पहली बार में जीतने का ख्वाब हमने देखा
बिन पथ के चलने का ख्वाब हमने देखा
साथ चलने को तो है सब तैयार थे अपने
पर अकेले चलने का ख्वाब हमने देखा
सागर की लहरों को नयनों में बसाया हु
इसे नयनों से हकीक़त में उतारने का ख्वाब हमने देखा
सब कुछ है अपने पास एक सुख भरी ज़िन्दगी जीने के लिए
खुद को अभाव के प्रभाव में रखकर जीने का ख्वाब हमने देखा
पर्वतों से गिरते झरनों को कोलाहल करते सुना
फूलों के ऊपर तितलियों को खुद के लिए लड़ने की चाहत देख कर दिल ने
इन सब को अपने लिए गाने का ख्वाब हमने देखा
जीतना तो है ही एक दिन हमें भी
बस खुद की जीत को एक मिसाल में बदलने का ख्वाब हमने देखा
बस शिव बनके सब रावणों को मारने का ख्वाब हमने देखा
बिन पथ के चलने का ख्वाब हमने देखा
♥♥♥शिव कुमार सिंह ♥♥♥

 

 

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