नन्हे नन्हे हाथों से तारों को छूने चलती थी

छोटी सी वो बच्ची थी हर पल मुझसे लड़ती थी
नन्हे नन्हे हाथों से तारों को छूने चलती थी
छोटी सी आँखें थी उसकी
जिससे सबको देखा करती थी
रोते रोते थक जाती थी तब मेरे पास वो आती थी
मेरा जेब से चोकलेट लेकर दबे पावं वो भागती थी
डरती थी मुझसे थोडा क्योकि मै था बड़ा उससे
कोई और नहीं था उसका साथी
इसलिए हर पल मुझसे खेला करती थी
नन्हे नन्हे हाथों से तारों को छूने चलती थी
चेहरे पे थी तेज उसके बोल में थी सुन्दर सुधा
इसी गुण से वो सबको जीतने निकलती थी
पावों में बड़े बड़े से चप्पल थे उसके
उसके साथ वो गिरते पलटते चलती थी
जब भी गिर के न उठ पाती थी वो
लोगों का झुण्ड निकल पड़ता था उसके हाथ के लिए
कारवां को देख डर कर झटपट दौड़े दौड़े भागती थी
चेहरे थे मलमल जैसे , बाल थे उसके घुघराले
जब उसकी अम्मा बाल सवारंती उस वक्त
वो खुद को बेबस समझती थी
कुछ पल की ही बात होती
फिर वह तितलियों की तरह उड़ने लगती थी
एक दर्द भरा दिन आया जब वह निकली अपने घर से
कुदरत का कुछ कहर गिरा, दुनिया छोड़ चली वो
आन्सुयों का सैलाब यहाँ था
रोने की थी गूंज यहाँ
एक नन्ही सी परी आज हमको छोड़ चली थी
खुद को न समझा सका मै उसके नहीं उसके घर वालों को
हर आंसूं की बूंदों में बस हर पल वो ही दिखती थी
उसकी मीठी मीठी बातों को जब भी सोचा करते थे
हर जगह मूरत उसकी अब हमको दिखा करती थी
दर्द से दर्द भी हार चूका था अब , न ही और ताकत थी हममे
जब भी दरवाजें खुलते थे उसके घर के
सिर्फ अपने आंखन से आंसू गिरा करती थी ..
सब कुछ हार चुके थे , कुछ नहीं था अब इस दुनिया में
वो प्यारी सी नन्ही सी बच्ची आखिर हमको छोड़ चली थी ….
♥♥♥शिव कुमार सिंह ♥♥♥

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