बजट से ………….

गाँवों के विकास पर
धन का आवंटन
हर बरस होता है
फिर भी गाँव
गाँव ही रहता है!!
शिक्षा के प्रसार पर
खूब खरच होता है
फिर भी शिक्षित
बेरोजगार रहता है!!
किसान के नाम पर
धन की बौछार
हर बरस होती है
लेकिन बेचारा किसान
पेड़ पर लटकता है!!
गरीबों के हित में
नित नई योजना का
जन्म होता रहता है
मगर,हाय रे किस्मत!
गरीबी का अम्बार
हर साल बढ़ता रहता है!!
रक्षा के खर्च का
आँकड़ा बढ़ता है
फिर भी
देश में आतंक
खूब फलता है फूलता है।
यह सब अजीब!
मगर सौ टका सच है,
क्योंकि –
बजट का
धन के आवंटन से
ज्यों ही मिश्रण होता है
तब-
कीड़े की लार
और
जनता के आँसुओं का
रसायनिक परिवर्तन होता है
यही कारण है कि –
पानी से भरा गिलास
जनता तक
बूंद बनकर पहुँचता है।

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