आज ज़िन्दगी कुछ यूँ मुड़ गयी है

आज ज़िन्दगी कुछ यूँ मुड़ गयी है,
गम के हर पहलुओं से जुड़ गयी है,
कमी हो गयी आज खुशियों की,
और ग़मों के साथ ये आगे बढ़ गयी है।।

हर ख़ुशी अब बेगानी सी लगती है,
अपनी ही गलियाँ आज बेगानी सी लगती हैं,
अपनों से इतनी दूर हो गये हम की,
हर भरी महफ़िल भी वीरानी सी लगती है।।

तुम्हारा यूँ अचानक दूर चले जाना,
ऐसी जगह जहा से फ़िर कभी लौट के ना आना ,
माना ये की रूठे थे तुम सबसे पर,
इतनी जल्दी कर दिया हमे इतना बेगाना।।

तकलीफ़ थी तो मुघे कहा होता,
तुम्हारे साथ ये पूरा जहां होता,
या फिर मुघे एक इशारा तो करते,
हस्ते हुए तुम्हारा हर गम सहा होता।।

खुद में ही सब सहते गए,
ठीक हूँ मैं बस यही सबसे कहते गये,
एक पल में इतने बेगाने हो चुके थे हम,
और तेरे अपने थे हम, सबसे कहते गये।।

हर पल हर लम्हा तुम्हे याद करेंगे,
हर मुलाकात में तुम्हारी बात करेंगे,
वैसे तो ग़मों की कमी नहीं पर,
तुम्हे कभी कोई गम ना हो ये फरियाद करेंगे।।

5 Comments

  1. shiv kumar singh shiv kumar singh 03/03/2013
  2. Kumar Gaurav 03/03/2013
  3. vijay 03/03/2013
  4. rahul 04/03/2013
  5. अभिनव 20/08/2014

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