जो होना है उसकी फ़िक्र न करो बस कर्म के धागे को टूटने न दो ..

उम्मीदें इन्शान को जीना सिखाती है उम्मीद का दामन, छूटने न दो ….
जो होना है उसकी फ़िक्र न करो बस कर्म के धागे को टूटने न दो ..
इन्शान की तो प्रकृति होती है पथ से भटकने की ,
बस इसको आप अपनी फ़ितरत बनने न दो…
जो चलते है थकान भी उन्ही को होती है
इस थकान को अपनी कमजोरी बनने न दो ..
अकेला ही आये है अकेले ही जाना है ये तो नैसर्गिक सत्य है जहाँ का …
फिर खुद को अकेला समझकर आगे बढने की आकांछा को विखंडित होने न दो
हालात इन्शान को कुछ पल के लिए बेबस और कमजोर बनाती है
इन हालात के आगे खुद को झुकने न दो
तुम्ही हो नायक . और खलनायक भी तुम्ही हो
खुद के जोश को निस्पंद व नाजुक होने न दो
अभी तो आये है यहाँ पे अभी तो करना है बहुत कुछ
खुद के संकल्प को को एक कमजोर सरिये में बदलने न दो …
लकीरें मिली हैं सबको यहाँ पे
इन लकीरों ऊही सिर्फ घिसने न दो
तुम्ही हो हीरा , चमक है तुम्हारी ,गिरने दो इसपे किरणों के झुण्ड को
सलाम करेगी दुनिया तुम्हे झुक कर एक दिन
बस अपनी चमक को मुट्ठी में सिमटने न दो …
जो होना है उसकी फ़िक्र न करो बस कर्म के धागे को टूटने न दो ..
♥♥♥शिव कुमार सिंह ♥♥♥

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