कर्म का फल हर किसी को मिलता है यहाँ

कर्म का फल हर किसी को मिलता है यहाँ
आशा और निराशा तो हर किसी को मिलती है
जो खुद को इन सब में स्थिर रखता है वही जी पाता है यहाँ …
मन उद्वेलित होता है बार बार अशोभनीय कृत्यों को देख कर
जो खुद ऐसा न करे वही सच्चा इन्शान कहलाता है यहाँ
जो रब को खुद के सत्कर्मों में देखता है
वही पूजनीय हो पाता है यहाँ
सम्यक दृष्टि और सम्यक ज्ञान हमारे अंतःकरण को जाग्रत करते है
जो इस जाग्रत रूपी दीप को सदा जलाये रखता है अपने दिल में
वही सच में रब के करीब जा पाता है यहाँ
मंदिरों में पूजन करने से कुछ हासिल नहीं होता
खुद को संतुष्टि की झूठी टोकरी में रखने का क्या फायदा
जो दिल से असहाय की मदद करता है हर वक्त
वही मंदिरों में रखे मूर्तियों से कही बड़ा हो पाता है यहाँ
ख़ुदा ने अपने प्राप्ति का जरिया नहीं बताया हमें
उसे हासिल करने के तरीके तो हमने खुद बनाये है
जो तरीके असहाय को खुदा से जोड़ते हो वही
सच्चे पथ का निर्धारण कर जाता है यहाँ
कोई इन्शान केवल अपनी सोच से महान नहीं बनता है
सोच को हकीक़त में तबदीली के साथ जीने वाला ही एक अजूबा कहलाता है यहाँ
कर्म का फल हर किसी को मिलता है यहाँ …
जो रब में आस्था रखते हुए हर कर्म करता है
वही सच्चे सुख का भागी हो पाता है यहाँ ….
♥♥♥शिव कुमार सिंह ♥♥♥

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