चिड़ियों का चहचहाना अब अच्छा लगता है …

चिड़ियों का चहचहाना अब अच्छा लगता है …
कल के ख्वाबों में डूब जाना अब अच्छा लगता है …
कल तक जिस रास्ते से हम दूर भागते थे
आज उसी राह पे राही बनके चलना अब अच्छा लगता है
कुछ पहले तक नादाँ थे हम जो लकीर खीचने से डरते थे
अब तो हर लकीर को अपनी तकदीर बनाना अच्छा लगता है ..
सूरज की पहली किरणे जब पड़ती थी अपनी नज़रों पे ,
खुद को कमजोर समझकर झुक जाती थी ये नज़रें
इन्ही नज़रों से आज उन किरणों को झुकते देखना अच्छा लगता है
कल के ख्वाबों में डूब जाना अब अच्छा लगता है …
जो नफ़रत करते थे हमसे हम भी वही करते थे उनसे
पर अब उस नफ़रत को मोहब्ब्बत में बदलकर जीना अच्छा लगता है
ज़ुल्मत भरी इस दुनिया में एक दीपक से जीवंत की कल्पना एक मिथ्या है
फिर भी एक चिराग जला के सही रास्ता दिखाना अच्छा लगता है ..
इन्शान है इन्शानो भरी ही दुनिया में बसेरा है अपनी
इसलिए इन्शानों के लिए जीना और मरना अब अच्छा लगता है …
सूरज की पहली किरणों से नजर मिलाना अच्छा लगता है …
♥♥♥शिव कुमार सिंह ♥♥♥

2 Comments

  1. jyotsna 02/03/2013

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