कमशिन थी आप तो

कमशिन थी आप तो
हम भी तो थे जवां
जब जाम टकराने लगी तो
सपने सुनेहरा बना दिया
ख्वाहिस थी आप को बस
छुनेको एक बार
दौलते हुश्न ने आपकी
मुझे लुटेरा बना दिया
गुनाह्गार था कुछ चलो
मान लेता हुँ मै अभी
आप भी तो नागिन ही थी
मुझे सपेरा बना दिया
इस गली मे जब आई थी
चाँदनी ही चाँदनी थी
जिस गली से आप आई
उधर अँधेरा बना दिया
निकाह की क्या खासियत
हमे कबुल ही कबुल था
मुफ़त मे बदनाम हुवे
और आवारा बना दिया
हरि पौडेल

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