सब कुछ जीवन में हर पल उही चलता रहता है

हर प्राणी के अन्दर प्रेम और नफ़रत का चिराग जलता है …
परिस्थितियों के सामने वो झुक कर इसे प्रदर्शित करता है …
आती है जब आपदा उसपर , खो देता है अपना धैर्य
फिर क्रोध भरी पकडंडी पे अलग ढलक निकलता है
भृकुटी उसकी तनी हुए , अंगारों से भरी लफ़्जे है
खुद को अकेला देख वह अब विचलित होता रहता है
खुद को नफ़रत से घिरा देख चिंतित होता है प्राणी
फिर खुद को बचाने की लालशा में ,प्रेम के पथ पे चलता है …
एक ख़तम तो दूजा शुरू यही सिलसिला चलता है
खुद पे गिरने देना मत ,गुस्से जैसे अंगारें को
मुतसव्विर करों की तुम ही हो प्रेम के दूत …
सब कुछ जीवन में हर पल उही चलता रहता है
कुदरत की इस करिश्माई दुनिया में हर पल कुछ शिक्षा मिलता है
कुछ और नहीं ,सुमधुर अल्फाजों से सिर्फ ये दुनिया चलता है
नफरत से हासिल हुआ कुछ नहीं , प्रेम को मित्र बनावों अपना
प्रेम का दीपक ही आखिर कल का सूरज बनके चमकता है …
♥♥♥शिव कुमार सिंह ♥♥♥

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