नवीन चेतना का संचार ……खुदा की इबादत

किसी ने फ़रमाया की हम तो अजनबी है इस दुनिया में अभी
कल कोई अपना बनेगा या नहीं , मुझे कुछ नहीं मालूम
खुद को ख़ुदा की इबादत में इस कदर मशगुल कर दूंगा …
की सब कुछ झुक जायेगा यहाँ और सब कहेंगे मुझे कुछ नहीं मालूम ..
नज़ारे ऐसे होंगे यहाँ की बस नजरें उठी ही रहेंगी सबकी
सब पूछेंगे की आपके इब्तिहाज का राज क्या है , मै खोमोशी से कहूँगा मुझे कुछ नहीं मालूम …
दिल नशीन है ख़ुदा यहाँ ,हम तो दिल फ़रोश है उसके
मंजिल मेरी वही है उसी को हासिल करना है हमें ,और इसके सिवाय मुझे कुछ नहीं मालूम …

2 Comments

  1. ashish 01/03/2013
  2. dharmendra 01/03/2013

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