फलक तक तनहा जाना ही है

है ज़िन्दगी हसीन मगर इसमें एक कमी सी है,
खुश भी हूँ काफी बस आँखों में नमी सी है,
सोचा दूर रखूँ खुद को तुम्हारी यादों से पर,
नामुमकिन था क्योंकि तुम्हारी यादें मेरी दिल में जमी सी हैं।।

तुम्हारी हर बातें मुघे याद आती हैं,
काफी कुछ हसाती और कुछ रुलाती भी हैं,
यूँ अचानक चले गये कुछ कहा तो होता,
तुम्हारे लिए कुछ कर न सके ये बात जान लिए जाती है।।

अकेले सब सहते गए किसी से कुछ कहा नहीं,
सारी तनहाइयाँ सहते गए जितना किसी ने सहा नहीं,
एक बार ही सही कुछ कहा तो होता,
या इसके काबिल हमे समघा ही नहीं।।

जिसकी किस्मत में जो है वो तो होता ही है,
कुछ पाके  तो कुछ खोना ही है,
हस्ते हुए बस तुम हमेशा कहते रहे,
साथ तो बस जमी का है,फलक तक तो तनहा जाना ही है।।

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