एक कप चाय

एक कप चाय  पिला  दो ना ……प्लीजएक कप चाय पिला दो नासुनकर गुस्सा बहुत  आता थाछोटी  थी  तो  पापा कहतेबेटा ज़रा माचिस तो लानाऔर धुँआ फैल जाता पूरे कमरे  में तेज गंध के  साथचाचा  का आना घर पर और  कहना चावल बना दो नाऔर सीटी की आवाज  से चार बजने का आभास हो  जाताबचपन से अब तक वो कहते  रहे मैं करती  रही तब भी लड़की थी ,,.और   आज भी लड़की हूँउनकी नज़रों में …..तुम्हारी नज़रों में …..पूरा शहर सुलग रहा हैइस ख़बर सेकौन है दोषी ? रेपिस्ट  या सोसाइटी ?तभी एक आवाज आई छोड़ो ये सबथोड़ी चाय पिला दो ना …..—स्नेहा —

One Response

  1. shiv kumar singh shiv kumar singh 03/03/2013

Leave a Reply