चित खोकर चितचोर हो गए

चित खोकर चितचोर हो गए
घनघोर अँधेरे भोर हो गए

खुद को खोकर तुझको पाया
हम चन्दा और चकोर हो गए

प्रीत का ऐसा है गठबंधन
तुम पतंग हम डोर हो गए

जलवा तेरे नूर का कुछ ऐसा है
उमरदराज फिर से किशोर हो गए

फासला इतना बड़ा था रूह से रूह तलक
पांव अपने देखकर मोर हो गए

***धर्मेन्द्र शर्मा***

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