सत्य की पहचान

सत्य की पहचान होती  है जरुर

हर सुबह  की शाम होती है जरुर।

बीच मे जब अर्थ आ जाता है तो

दोस्ती  नाकाम  होती है  जरुर   ।

क्या करें सब फर्क है तकदीर का

हर कली बदनाम होती है जरुर ।

प्यार से जब  चूमता हूं उसके गाल

तो बहन कुर्बान होती है जरुर।

मिल गई जो भी समन्दर के गले

वो नदी गुमनाम होती है जरुर।

बन्द कमरो मे कभी पलती नहीं

जिन्दगी कुछ आम होती है जरुर।

शिवचरन दास

वडोदरा

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  1. Dharmendra Sharma 26/02/2013

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