चोरों ने फिर रचा स्वयंवर

गंदे नाले बने समंदर
रंगदार अब बने सिकन्दर

सत्ता के गलियारों में देखो
इधर भी बंदर उधर भी बंदर

सच्चाई के पहरेदारो
झूठ छुपे तुम सबके अंदर

किसे करें मतदान इस बरस
चोरों ने फिर रचा स्वयंवर

उसका रोना चीखना कौन सुनेगा
कानों में तो रुई भरी है सबके अंदर

चिंगारी सी सुलग रही है
तेरे अंदर मेरे अंदर

—-धर्मेन्द्र शर्मा —–

11 Comments

  1. yashoda agrawal 25/02/2013
    • Dharmendra Sharma 26/02/2013
  2. manoj charan Manoj Charan 25/02/2013
    • Dharmendra Sharma 01/03/2013
  3. Gurcharan Mehta 'RAJAT' Gurchara Mehta 25/02/2013
    • Dharmendra Sharma 26/02/2013
  4. vandana 27/02/2013
    • Dharmendra Sharma 01/03/2013
  5. shiv charan dass dasssc 26/04/2013
    • Dharmendra Sharma 08/05/2013

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