यह देश चलता कैसे है

यह देश चलता कैसे है

सीधे-सुलझे रिश्ते भी,वो उलझाते कुछ ऐसे हैं
नहीं जानता राम-रहीम,यह देश चलता कैसे है

समस्या से समस्या का,वो गुणाकार ही करते हैं
इसकी टोपी उसके सिर पर,खेल खेलते रहते हैं
चोर-चोर मोसेरे भाई, ये चेहरे मिलते जुलते हैं
नहीं जानता राम-रहीम,यह देश चलता कैसे है

भूखे बेबस लोगों को भी,वो पल में धनी बनाते हैं
चुपके-चुपके प्रेम जताते ,सभा भवन में लड़ते हैं
भारत का नक्शा कागज पर लगता सुंदर ऐसे है
नहीं जानता राम-रहीम, यह देश चलता कैसे है

क्लर्क किरोड़ीमल,अफसर लक्ष्मी पुत्र से लगते हैं
नेता हैं कुबेर मित्र, लोग निर्धन बेहाल बिलखते हैं
काले धन की भरी तिजौरी,स्विस बेंक में पैसे हैं
नहीं जानता राम रहीम, यह देश चलता कैसे है

दशहत में जीती है जनता,वो जेड सुरक्षा रखते हैं
होते रहते बम्ब धमाके वो पैसे मुर्दों पर बरसाते हैं
संवेदन बातों की मरहम,फिर सबकुछ जैसे वैसे हैं
नहीं जानता राम-रहीम, यह देश चलता कैसे है

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