आज फिर तुम्हारी याद आ गयी

तेरी राह तकते तकते अखियाँ  तरस गयीं,
थोड़ी देर रुकीं और फिर बरस गयीं,
इन तरसीं अंखियों की खातीर तुम आना जरुर,
अपना किया हुआ वादा तुम निभाना  जरुर।।

दुनिया के इस भीड़ में,लगे बहुत से मेले हैं,
कल भी हम तन्हा  थे,और आज भी यूँ  अकेले हैं,
तन्हाइयों की तो अब आदत सी हो गयी है,
तुम्हे याद करना अब इबादत सी हो गयी है।।

ये घनघोर घटायें बस तेरी याद दिलाती हैं,
तेरी यादों की पोटली लिए बस अखियों में आँसू लाती हैं,
इस धीमी धीमी बारिश में जब आकाश लहराता है,
ये नादाँ दिल भूल के सब, तेरी यादों में खो जाता है।।

रब से ये फरियाद किये,पल पल बस तुमको याद किये,
मन में तेरी मूरत थी,और हाथों  में कुछ दीप लिए,
यादों की माला  पिरो के तुम्हारी तस्वीर को पहनाई है,
आज फिर तुम्हारी याद  आ गयी, और ये अखियाँ भर आई हैं।।

Leave a Reply