मैं पतंग नहीं

बड़ा मजबूत है ये प्यार का धागा कभी कट नहीं सकता
जितना दोगे ओर बढ़ेगा ये प्यार कभी घट नहीं सकता

मील के पत्थर की तरह बताऊंगा मैं तुम्हे तुम्हारी मंजिल
अब लिख दिया है जो दिल पर तुमने तो कभी मिट नहीं सकता

कर लिया जो फैसला जो आप का साथ निभाने का
और किया है जो वादा मैने तो अब पलट नहीं सकता

दोस्तों तुम कर लो बेशक ! कोशिश मुझे बहकाने की
मैंने पा ली है मंजिल मेरी अब कभी भटक नहीं सकता

मेघा रे बरसो तुम जितना भी झूम-झूम
मैं पतंगा हूँ, पतंग नहीं, कभी फट नहीं सकता

काँटों बिछ जाओ तुम जितना भी मेरी राह में
मैं फूल हूँ , खुशबु से अपनी कभी हट नहीं सकता

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गुरचरन मेह्ता

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  1. Dharmendra Sharma 26/02/2013

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