भारत माता हरा दी

बहरी हो गयी गूंगी हो गयी ये अपनी सरकार

नपुंसक बन गयी देखो ये हो गयी बिलकुल बेकार

दुशासन करे चीर द्रौपदी नहीं है कोई कृष्णा

सीता कब बाहर निकले,  है रावण तैयार

 

अन्दर करते थु, तू-तू , बाहर सिखलाएँ मर्यादा

जनता को समझे गधा – जब चाहे ये लादा

अपनी मर्यादा में रहना कब सीखेंगे ये फरेबी

जो अन्दर से ठग है ओर खतरनाक है इरादा

 

चलती थी जिसके सहारे वो लकड़ी टूटी देखो

खुद अपने को कोसे, धरा की किस्मत फूटी देखो

वो बेटे तो चले गए जिन पर नाज सभी को कभी था

आज धरा के बेटों ने धरा की अस्मत लुटी देखो

 

जनता की पुंगी बजती रहे नेता तो बस ये गाये

कुर्सी मिलते ही जनता को कर देते बाए-बाए

भोली जनता को सब ठग ले फिर पूरब हो या पश्चिम

सन्यासी अब बने लूटेरे, कौन किसे समझाए

 

आजादी का पर्व मनाते, क्या सच में मिली आजादी

धोती कुरता पहन ले ये उपर से ले-ले खादी

पहले अंग्रेजों ने लुटा अब अपने भाई आ गए

जीत के अपनी आजादी को भारत माता हरा दी  

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गुरचरन मेह्ता

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