नेता जी की दाल

सूरज पर चढ़कर बैठे जिन्होंने दिन में देखे तारे

भंडारों में खाते थे अब जिनके भरे भंडारे

अरे नेता बन गए, जो यहाँ वहां फिरते थे मारे-मारे

लूट लिया उन सभी को जो भी फंसा है इनके लारे

 

राजा हो या लालू हो या फिर कन्निमुइ-कलमाड़ी 

देश का हर वाशिंदा इनके लिए है अनाड़ी

ये रोटी को रोटी बोले, हम रोटी को चोची

देश की किस्मत इन सबने मिलकर ही है नोची

 

छेद करें उस थाली में जिस थाली में ये खाते

स्विस बैंक में तभी तो खुलते इनके नए-नए खाते

जूता चप्पल घिसता देखो आम आदमी पिसता

भूखो मर रहे हम यहाँ ये खाएं काजू पिस्ता

 

करें देश से गद्दारी और दें जनता को धोखा

मौक़ा देख कर मारें चांटा और मौक़ा देख कर चौका

हम सभी है इनके चमचे और ये हम सबके पतीले

नजर नहीं आते हमें वो जो अन्दर है दांत नुकीले

 

पीकर ये डकार न ले – इनके लिए देश है देशी मठ्ठा

इनके लिए हर देशवासी है उल्लू का पठ्ठा

लोकतंत्र का नाम है केवल, नेता देश के मालिक

तन के उजले- उजले है पर मन में भरी है कालिख

 

फँस जाए अच्छे से अच्छे ऐसे इनके जाल

बाबा हो या अन्ना हो, या फिर केजरीवाल

ये खदेड़ दे सभी को भैया, चलें ये ऐसी चाल

प्रेशर कुकर कैसा भी हो, गले बस इनके दाल

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गुरचरन मेह्ता 

4 Comments

  1. CB Singh 24/02/2013
    • Gurcharan Mehta 'RAJAT' Gurcharan Mehta 26/02/2013
  2. Dharmendra Sharma 24/02/2013
    • Gurcharan Mehta 'RAJAT' Gurcharan Mehta 26/02/2013

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