कुञ्ज गलिन में कुंज बिहारी

कुञ्ज  गलिन में कुंजबिहारी ।
घूम रहे थे झूम रहे थे संग में थी श्री राधा प्यारी ।
ललिता और बिसाखा दौड़ी युगल स्वरूप मनोहर जोड़ी,
कृष्ण राधिका को जब देखा चकित हो गई वृज की नारी ।
मुसका कर श्री राधे बोली वृज बाला तुम सब हो भोली,
कृष्ण प्रेम में फंस जावोगी देखो तो कछु दसा हमारी ।
सखियाँ बोली बड़ा जाल है हम सबका भी यही हाल है,
जो होगा होने दो राधे सुध बुध भूल गई हम सारी ।
शिवदीन कृष्ण ने रास रचाया श्री राधा ने जगत नचाया,
श्रीराधा कृष्ण रटो  मन मोरे पूर्ण ब्रह्म हैं गिरवर धारी ।

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