तुम्हारी यादें-मेरी फरियादें

जिन्दा हैं फिर भी जीने में एक कमी सी है,
खुश तो हैं पर आँखों में एक नमी सी है,
राहें  तो बहुत मिली आगे बढ़ने को,
बस आसमा मेरा था और तुम्हारी यादें वहा जमी सी हैं।।

उस ज़मी पे कैसे जाते हम ,
वहां अपना आशियाँ कैसे बनाते हम,
हर कदम चलते हुए बस तुम याद आये,
बस यादों के सहारे कैसे दिए जलाते हम।।

तुम्हारी उस जमीं पे एक आशियाँ बनायेंगे,
तुम नहीं हो फिर भी तुम्हे बुलाएँगे,
उस दिए की खातीर आ जाना जो आज भी तुम्हारी याद में जलता है,
है तो दिया लेकिन मोम  की तरह पिघलता है।।

तुम युहीं बिना कुछ कहे चले गये ,
ये बात आज भी दिल को सताती है,
कही तुमने मुघे बुलाया हो और हम ना आ पाए हो,
ये बात मेरी जान लिए जाती है।।

ये बात तुम तक पहुच जाये बस इतनी फरियाद है,
तुम खुश रहना बस क्योकि यहाँ सबकी ज़िन्दगी आबाद है,
तुम्हारी कमी तो हर पल रहेगी,
पर ये खुदगर्ज़ ज़िन्दगी क्या करे,उसे भी प्यार से सहेगी।।

3 Comments

  1. Kumar Gaurav 22/02/2013
  2. rajeev kumar 23/02/2013
  3. Arun Kumar Singh 04/03/2013

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