माँ मैं भी तो एक जान हूँ

माँ मैं  भी तो एक जान हूँ ,
मैं भी तो तेरी पहचान हूँ ,
क्यों दुखी है तु  मेरे आने से,
या डर है तुघे इस ज़माने से।।

कि ये दुनिया तुझे ताने देगी,
कही समाज में नहीं जाने देगी,
माँ मैं भी तो तेरा सम्मान हूँ ,
अभी तो मैं  इस दुनिया से बिलकुल अनजान हूँ।।

मुझे पता है तुझे मेरी चाह न थी ,
तेरे पास आने के अलावा और कोई राह न थी,
माँ तू चिंता क्यों करती है,
मेरे आने से इतना क्यों डरती है।।

माँ मैं अपनी किस्मत खुद बनाउंगी ,
तुझे तेरा पूरा सम्मान दिलाऊँगी ,
सारी दुनिया तुझे जानेगी ,
इस परी की माँ के नाम से जानेगी।।

मत फेर ऐसे अपनी नज़रे मुझसे,
बेताब थी मैं तुझसे मिलने को कबसे ,
तेरी कोख में मुझे बहुत सुकून मिला ,
इस दुनिया से दूर ना कोई शिकवा और ना  कोई गिला।।

माँ तुही तो मेरा सहारा है,
मैं एक नदी हूं तू मेरा किनारा है,
मत रो माँ मेरे पैदा होने से,
या डर  है तुझे तेरा कुछ खोने से।।

एक बार मुझे अपने गले से लगा ले ,
माँ एक बार अपने आँचल में छुपा ले ,
तेरी ही बेटी हूँ बस तेरे लिए जीऊँगी ,
आज दूध पिला दे कल ज़हर का घूंट भी प्यार से पिऊँगी।।

तेरी हर बातें मैंने अंदर से ही सुनी थी,
वो हर चीज़ जो तुने सबसे कही थी,
तूने ही तो कहा था सब अपनी किस्मत ले के आते है,
फिर बेटी हुई तो गोद में लेने से भी कतराते है।।

माँ सबको बोल ना की यूँ  मुझसे नज़रे ना फेरे,
तू तो सोयी है सबको बोल की मुझे गोद में लेलें ,
तुम सब यूँ दूर जाओगे तो मैं तो डर जाऊँगी ,
यूँ अकेले तनहा कब तक जी पाऊँगी।।

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