लिखता कहाँ हूँ

लिखता कहाँ हूँ
सिगरेट की मानिन्द
सुलगा जिन्दगी को
धुँआ जज्ब़ कर लेता हूँ
राख़ झाड़ देता हूँ पन्नों पे…

One Response

Leave a Reply