ग़जल

जब सामने आयेंगे वह
कैसे इकरार करुंगी
चुप चुप ही बैठे बैठे
बस उन्हे प्यार करुंगी

गुंगी हुई तो क्या हुवा
मोहब्बत है मेरी पाक
कर हरकते मेरी बदन से
बस इजहार करुंगी

बोलु तो कैसे उनसे हम
खुदाने इजाजत ही नही दी
नजर ही नजर देखकर
बस उन्हे प्यार करुंगी

इशारो ही इशारो से उनसे
मै मोहब्बत जताउङ्गी
सुबह से लेके शाम तक
बस इन्तजार करुंगी

हरि पौडेल

Leave a Reply