मेरा पैगाम​…

तेरा वो,मुड़ के ना देखना;
हैरान करता है…!!!
तेरा वो,हर बात में ना कहना;
परेशान करता है…!!!

तेरा वो,मुझे बार बार रोकना;
बेताब करता है…!!!
तेरा वो,हर बात में विराम लगाना;
बेकरार करता है…!!!

मेरा वो,हमेशा ईन्तजार करना;
तूम्हे बेकार लगता है…!!!
मेरा वो,इसमें इकरार ढूंढ़ना;
हमें प्यार लगता है…!!!

मेरा वो हमेशा,तेरा ध्यान रखना;
तूम्हे गूनाह लगता है…!!!
मेरा इस,जहां मे तूम्हे ढूँढना;
मूझे पनाह लगता है…!!!

तेरा वो,हर साथ को एहसान कहना;
दिल तोड़ जाता है…!!!
तेरा वो,मेरी ईज्जत करना;
दिल जोड़ जाता है…!!!

तेरा वो,मेरे से दूर जाने की सोचना;
झकझोर जाता है…!!!
तेरा वो,झटपट माफ़ कर देना;
सराबोर कर जाता है…!!!

तेरा वो,दूनियाँ मे अनमोल होना;
ख़ूदा का,एहसान लगता है…!!!
तेरा वो,खूद को कम समझना;
खूद को बदनाम लगता है…!!!

मेरा वो,तुम्हे खूश देखना;
मुझे जीत लगता है…!!!
तेरा वो,मुसकुराना;
संगीत लगता है…!!!

जहां रहो,मुसकुराते रहो;
दिल यही पैगाम देता है…!!!
जब याद करो,हम पास होंगे;
रौशन ये वादा,आज करता है…!!!

मुस्कान जो,तुम्हारी है;
मेरे लिये,खाश रहेगी…!!!
ख़ूदा से,दुआ हमारी है;
सदा तुम्हारे,पास रहेगी…!!!

बाकी बातें,फिर करेंगे;
तुम्हारी कहानी,फिर सुनेंगे…!!!
जब तक,मै जींदा हूँ;
ये साँसे,तुम्हारे नाम करेंगे…!!!

रौशन तो,हवा का झोका है;
कभी आयेगी,कभी जायेगी…!!!
चलती रहे,तो जिंदा है;
वरना रौशन की,राख चलेगी…!!!
————————–रौशन कुमार सुमन​

4 Comments

  1. yashodadigvijay4 21/02/2013
  2. पंकज 23/02/2013

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