बारिश ने मचलकर

बारिश ने मचलकर
जब बाल झटके
मैंने महसूस की उसकी फुहार
अपने बिस्तर तक
छींटों की छमक ने जगा दिया
कुछ अधसोये ख्वाबों को
कितना शोर मचाते हैं
जब उनींदे ख्वाब
गीले हो जाते हैं…

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