देर तक मैं अम्बर पे नजर टिकाये था

देर तक मैं अम्बर पे नजर टिकाये था,

सुना था कि आसमान से एक परी गुजरती है,

वादी में मैं शान्त सा बदन लिटाये था,

सुना था कि एक ईश्वर की एक छवि गुजरती है,

तनहाई के उस वक्त में बस पता चला इतना,

कि हल्की सी तेरी लफ्ज की एक हंसी गुजरती है.

 ः-सुहानता ‘शिकन’

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