नाराज हैं वो कि चांद बदली में है

नाराज हैं वो कि चांद बदली में है,

सपना है ये या सब असली में है,

मैं भी मैं हूं या कोई और ही हूं,

क्यूं रहस्यमयी आज सब ही में है.

                     ;-सुहानता ‘शिकन

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