मेरा दिल भी शौक से

मेरा दिल भी शौक से तोड़ो एक तजुरबा और सही,
लाख खिलौने तोड़ चुके हो एक खिलौना और सही,
रात है गम की आज बुझा दो जलता हुआ हर एक चिराग,
दिल मेँ अंधेरा हो ही चुका है घर मेँ अंधेरा और सही
दम है निकलता एक आशिक का भीड़ है आकर देख तो लो
लाख तमाशे देखे होँगे एक नजारा और सही
खंजर लेकर सोचते क्या हो कतल ए मुराद भी कर डालो
दाग़ हैँ सौ दामन पे तुम्हारे एक ईजाफा और सही…।।।

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