प्रेरना

रासते है कच्हे, मनझिल है दूर
नाउ भी है रास्ता, आसमान है भरपूर
राह मे चलते चलते गिर ना जाना
वरना कहोगे खुदसे, अभी मनझिल है काफी दूर

मनझिल तक है तुज्हे पहुचना
मुशकिले तुज्हे मिलेनगी बहुत
जो राही मुशकिल से जीता
उसके कदम रहेन्गे मझबूत

झिन्दगी अपनी है कोइ जुआ नही
खेल हर कोइ खेलता है पर उन्मे हम नही
ये साझिश है खुदा की, जो इमतेहाम मिलते है
मनझिल के बिन तुम झिन्दगी कभी तबाह करना नही

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