सार्थतकता नाम की/ हास्य कविता

हास्य कविताएं ( कुण्डलियाँ )

1 निरमल कुमार गंदे भए, और चतुरसींग संठियाय |

अजि नैनदास अंधे भये, और शांतिलाल खिसियाय |

और शांतिलाल खिसियाय, भए चमन लाल वीरान |

देखा हमने श्रवणलाल भी, गायब थे जिनके कान |

कलीराम जी खिले-खिले, और बली रामजी निरबल |

चरणदासजी सबसे अच्छे, रखते पाँव सभीके निरमल |

2 गिरधरलाल फिसड्डी देखो, हृदयलाल भावना विहीन |

सत्यनारायण जी  सड़े जेल में, वरि  मीठामल  नमकीन |

वरि  मीठामल  नमकीन, हीरालाल छदाम को तरसे |

गरीबदास की फ्लैट में, जब देखो तब सोना बरसे |

कुछ बालाएँ धारण करतीं, बदल-बदल कर दिलवर |

गणित लगाना आता हो तो, देखो कितने फीके गिरधर |

3 चिंताराम बेफ़िकर देख लो, और धनीराम कंगाल |

ये हालत है प्रविणकुमार की, सकै न नाक सम्हाल |

सकै न नाक सम्हाल , देखो यशवंतजी की बदनामी |

हरिशचंद्रजी छप रहे हैं, सवालाख के दस्यु इनामी |

रूपनारायण को देखकर, बच्चों को आ जाए हाज़त |

भीमसेनजी मरियल लगते , किसने की ये हालत |

4 मरता है कोइ सुबह-सुबह, नाम था जिनका जीवनलाल |

नाम की उल्टी माया देखो, फंस गये चक्र में सुदर्श्नलाल |

फ़ंस गये चक्र में सुदर्शनलाल, औरन से कहत ये डोलें |

नामकरण ऐसा न हो,  कि कोई व्यंग्य की वाणी बोले |

है इससे बचने का ऊपाय मगर, कवि ये कहते डरता है |

नाम करण उस समय कीजिये, आदमी जब मरता है |

 

 

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