स्वास्थ्य रक्षक कविता 2

1 फटी एड़ियाँ ठीक करे और फटने से बचाए |

हल्दी और मलाई का जो नित लेप लगाए  ||

2 जो कफ़ प्रकोप हो जाए ,रह-रह के ठुसकी आए |

पीसी- हल्दी फाँक मार के,  दूध गरम पी जाएँ ||

3 मधु-मक्खी गर काट ले,  दंश  गड़ी रह जाए |

घृत तुलसी सेंधा- नमक, पीस तुरंत लगाएँ ||

4 बूंदें कुछ तुलसी के रस की, किंचित नमक मिलाय |

तब डालें स्वर चलित नाक में, बेहोश होश में आय ||

5 रस लें चम्मच चार प्याज का, जो हो जाए भगंदर |

बुकनी चम्मच दो मिश्री का, झट डालो पेट के अंदर ||

6 बीज शरीफा  पीसकर,    लीजै चूर्ण बनाय ,

हेय्रर-आइल में डालकर, दीजै खूब हिलाय |

नित्य केश मर्दन करै, जूँ डेन्ड्रफ हट जाय ||

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