प्रीत लगी कुछ ऐसी उनसे

प्रीत लगी कुछ ऐसी उनसे
दीदार हुये तब कह नही पाया
जब रुखसत हुई तो
याद आया था
आँखे उनकी झुकी हुई थी
उन्हे छुने को जी चाहता था
जब रुखसत हुइ तो
याद आया था
पलट के जब उन्होने देखा था
उन्हे बुलाने को जी करता था
जब रुखसत हुइ तो
याद आया था
दुपट्टे उनकी जब सरक गई थी
गले मे अपनी लगाना चाहता था
जब रुखसत हुइ तब
याद आया था
हरि पौडेल
नेदरलैंड

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