स्वास्थ्य रक्षक कविता 1

1* जो करते नहीं परहेज़, तो दवा क्यूं खाते हैं |                                          .  ,

चंगा भी होते नहीं, और ज़ेब कटवाते हैं |

जो करते नहीं परहेज़, तो दवा क्यूं खाते हैं,

2* करते हैं धरमो करम, शिव-राम को मनाते हैं |.

। पेट बनाया कूड़ा-दान, मुँह बकरी सा चलाते हैं |                                                 .

अल-सुबह कभी उठते नहीं, तो दवा क्यूं खाते हैं |

जो करते नहीं परहेज़, तो दवा क्यूं खाते हैं |

3* कब्ज़ दूर करते नहीं, चाय बीसियों बार पीते हैं |
रात टाइमली सोते नही, धुँआ इंजन सा छोड़ते हैं |

चूसते हैं रोज़ बेड-टी, तो दवा क्यूं खाते हैं |

जो करते नहीं परहेज़, तो दवा क्यूं खाते हैं |

4* कभी करते जो मालिश नहीं, वर्जिस भी करते नहीं |

महफिलों में उल्लू सा, जो रात-रात भर जागते हैं ||

.   उषा-पान कभी करते नहीं, तो दवा क्यूं खाते हैं |

.   जो करते नहीं परहेज़, तो दवा क्यूं खाते हैं |

5*.हकीम ये बातें बताते नहीं,गर बताएँ तो हम मानते नहीं|

.  बंद कर दें हराम-लुक़मा,  मरीज़ क्यूँ कहाते है |

.  बदलते रहते हैं गर पेथी, तो दवा क्यूँ खाते हैं |

.  जो करते नहीं परहेज़, तो दवा क्यूं खाते हैं |

6* बनता है पेट में एसिड, और खटाइ भी खाते हैं |

.  लहसून कभी खाते नहीं, मूली रात में खाते हैं |

.  दिनचर्या बेकायदा है, तो दवा क्यों खाते हैं |                                                   .

जो करते नहीं परहेज़, तो दवा क्यूं खाते हैं,

7* फ़िक्र है  क्रीज़ की, बैठकर कभी छोड़ते नहीं |

पड़ी है जेबमें माचिस, और कमरों में ढूंढते हैं |

वीक है जो मेमोरी, तो दवा क्यों खाते हैं |

जो करते नहीं परहेज़, तो दवा क्यूं खाते हैं,

जब करते ही हैं परहेज़, तो दवा क्यूँ खाते हैं |

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