तितली

तितली

उड़ने दो तितलियों को मुक्त गगन में
इनके बिना यह गगन बेरंग लगता है

रहने दो तितलियों को हर उपवन में
इनके बिना उपवन बदरंग लगता है

मंडराने दो तितलियों को गमलों में
इनके बिना गमले रंगहीन लगते है

गाने दो तितलियों को प्रीत के गीत
इनके बिना सब सुर बेजान लगते हैं

फैलने दो पंख तितलियों के गली में
इनके बिना गली सुनसान लगती है

फलने दो तितलियों को हर कोख में
इनके बिना सोगात अधूरी रहती है

बेरहम बनकर इनके पंख मत कुचलो
इन्ही से हर रिश्तें की शरुआत होती है

इंसान हो तो इंसानियत की राह चलो
इनके अपमान से धरा बदनाम होती है

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