क्यों हमको नजर न आते

क्यों तुम हो भगवान् कहाते?
धुन बंशी की मधुर बजाते।
माँ कहती कण-कण में बसते,
फिर क्यों हमको नजर न आते।।

सूरज दादा दिन में आते,
चन्द मामा रात सजाते।
दोनों हैं जगमग तुमसे ही,
लेकिन तुम क्यों नजर न आते।।

माखन रोज चुराकर खाते,
पर चोरी है बुरी बताते।
ये कैसी लीला है तेरी?
हम क्यों इतना समझ न पाते।।

अगर कभी इस जग में आते,
हमको भी तो दरश दिखाते।
माँ कहती तुम यहीं बसे हो,
फिर क्यों हमको नजर न आते।।

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