जीवन पथ ही मोड़ गया

लेकर चला गया मन मोरा,
जाने तन क्यों छोड़ गया?
एक प्रेम का दीप जलाकर,
जीवन पथ ही मोड़ गया।।

गोरे तन के कोरे मन में,
श्यामल छवि का वास हुआ।
प्रेम-सुधा में बंधी चेतना,
अन्धकार का नाश हुआ।
मलिन ह्रदय का मैल हटाकर,
माया का भ्रम तोड़ गया।।
एक प्रेम का दीप जलाकर,
जीवन पथ ही मोड़ गया।।1।।

मन का मैल हटाकर देखा,
मुझमे-उसमे भेद न था।
मन से हुआ मिलन जब मन का,
अँधियारा भी शेष न था।
मन में अपना रूप बनाकर,
सत्य मार्ग से जोड़ गया।।
एक प्रेम का दीप जलाकर,
जीवन पथ ही मोड़ गया।।2।।

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