जरा सा और सोने दो

जरा सा और सोने दो |
अभी तो रात बाकी है ||

हो रही आँखें उनींदी ,
स्वप्न में अब डूब जाऊं |
कुछ घडी भूलूं जगत को,
जब दिवा से उब जाऊं |

जरा स्वप्नों में खोने दो,
अभी तक आस बाकी है |
जरा सा और सोने दो |
अभी तो रात बाकी है ||१||

चल दिए अब तुम कहाँ ?
कुछ प्रहर का संग तो हो |
दो घड़ी को और ठहरो,
शून्यता यह भंग तो हो |

जरा सा और जीने दो,
अभी तक साँस बाकी है |
जरा सा और सोने दो |
अभी तो रात बाकी है ||२||

2 Comments

  1. Dharmendra Sharma 06/03/2013

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