सन्त महन्त

दाता वह बहुत बडा देता जो अनमोल दान बदले में वह कुछ न लेता वह सन्त है बहुत ही महान।

जिसने ले लिया हो सन्यास उसे भला फिर किसी से क्यों क्या हो आस।

प्यासे हैं जो धन के वह हैं लोभी महन्त छोड अपनी कुटिया खुद भी डूबते हैं

साथ डूबाते है सबकी लुटिया बनाते हैं वह अपने लिए महल मकान

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