प्रभु खुद मे है समाए

खोद खोद के ढुंढ रहे हो
मन्दीर मन्दीर तुं जाए
सुबह उठ के मन्त्र तुं जपते
ठंडे पानी नहाये

खोल के पढ ले गीता को तुम
कृष्ण अर्जुनको सम्झाए
युद्ध कर अर्जुन
न शोच बहुत तुम
सब मे मै हुँ समाए

मुरख सब ये समझ न पाते
तीरथ कर कर जाए
कस्तुरी मृग के भाँती
खोज खोज पछताये

लुट लुट कर धन कमाई
सोचे दान कर कर के वच जाए
पट मुर्ख की भिड लगी है
इनको कौन सम्झाए

मोक्ष पाने के लालच मे ये
गङ्गा खुब नहाये
अज्ञानी हैं समझ न पाते
प्रभु खुद मे है समाए

हरि पौडेल
नेदरलैंड

Leave a Reply