गुरु गोविन्द के सम कौन है दाता

शिवदीन निरंतर ध्यान लगा, गुरु गोविन्द के सम कौन है दाता
वेद  पुराण गुरु  छवूँ शास्तर, राम रामायण सत्य है नाता ।
गीता का ज्ञान व ज्ञान गुरु श्रुति न्याय व सूत्र गुरु समझाता ।
पृथ्वी जल और आकाश गुरु, चहूँ और गुरु ही गुरु दरसाता ।
शिवदीन निरंतर ध्यान लगा, गुरु गोविन्द के सम कौन है दाता ।
धन्य गुरु बिन ज्ञान कहाँ, उर ध्यान कहाँ  गुन को लखि पाता ।
गुरुदेव के चरण गहो मन रे, शरण रहो सन्मार्ग बताता ।
धन्य है धन्य वही जन धन्य है, जो गुरुदेव को नित्य रिझाता ।
शिवदीन निरंतर ध्यान लगा, गुरु गोविन्द के सम कौन है दाता ।
राम गुरु श्रीकृष्ण गुरु, सर्वस्व गुरु धन हो पितु माता ।
श्रेष्ट गुरु सबसे तुम हीं, उर माहिं बसों सब तत्व के ज्ञाता ।
दरबार गुरु सब सार गुरु व बहार गुरु, गुरुदेव विधाता ।
शिवदीन निरंतर ध्यान लगा, गुरु गोविन्द के सम कौन है दाता ।
स्वर्ग गुरु बैकुंठ गुरु ब्रिजधाम बृज धाम गुरु, चहुँ  ओर लखता ।
गुरु हैं गुरु मेरा प्रेम गुरु, शुभ नेम गुरु उर  माहिं सुहाता ।
अनुराग गुरु वैराग्य गुरु बड़ भाग्य गुरु, गुरु पाठ पढ़ता ।
शिवदीन निरंतर ध्यान लगा, गुरु गोविन्द के सम कौन है दाता ।
गुरु ब्रह्म हैं ब्रह्मा हैं विष्णु गुरु, शिव सत्य स्वरूप है सृष्टि रचाता ।
सुर संत फनिन्द्र मुनीन्द्र गुरु ,रवि चन्द्र वही कोउ पार न पाता ।
सर्वज्ञ अनन्त अखंड गुरु, गुरु ज्ञान की ज्योति हृदय में जगाता ।
शिवदीन निरंतर ध्यान लगा, गुरु गोविन्द के सम कौन है दाता ।
शेष महेश गणेश दिनेश हटा  भ्रम  सत्य स्वरूप लाखता ।
भव पार लगावनहार गुरु, जय सत्य गुरु लखि भाग्य सराता ।
रंक से राव बने पल में, गुणगान यहि विधि से कोउ गाता ।
शिवदीन निरंतर ध्यान लगा, गुरु गोविन्द के सम कौन है दाता ।
शत-शत बार प्रणाम करूँ, गुरु दीन जनों के हो भाग्य विधाता ।
पापिन के उद्धारक हो तुम, ज्ञान समुन्दर ज्ञान के दाता
हे गुरुदेव दयामय प्रेम दे, प्यार अनुपम आपसे पाता  ।
शिवदीन निरंतर ध्यान लगा, गुरु गोविन्द के सम कौन है दाता ।

शेष महेश गणेश थके वह धन्य दिनेश थके थकि जाता ।
सारद बीन बजाय थके ऋषि नारद इन्द्र अमि बरसाता ।
बलिहारी गुरु गुन गाय़ रहे  नर नाग कवि कोउ पार न पाता ।
शिवदीन निरंतर ध्यान लगा , गुरु गोविन्द के सम कौन है दाता ।